योगेश्वरके वाहक बनकर

સામાન્ય

अग्रतश्चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः।

इदं ब्राह्ममिदं क्षात्रं शापादपि शरादपि॥

 

योगेश्वरके वाहक बनकर

हृदय हृदय हम जायेंगे

कृष्ण प्रभुके  गीतामृतको

अधर अधर ले जायेंगे

 

मृत: प्राय जीवन है सबका

जीवन में कोई आश नहीं

सुंदर तेजस्वी जीवन के

मानव मुल्य बतायेंगे . . . योगेश्वरके . . .

 

रामायण के राम सीता ना

पुस्तक में बंधीत होंगे

राम सीता के जीवन को

शोणीत कण में प्रसरायेंगे . . . योगेश्वरके . . .

 

कृष्ण कनैया बंसी बजैया

को ना हमने जाना है

योगेश्वर की अमर कहानी

घर घर में ले जायेंगे . . . योगेश्वरके . . .

 

याज्ञवल्क्य अत्री वाल्मीकी

व्यास सभी मन भाये है

ॠषि जीवनकी तेज अस्मिता

का दिपक प्रगटायेंगे . . . योगेश्वरके . . .

 

घुमते है आराम को पाने

राम जीवनसे खोया है

जीवन की हर क्षण क्षण में हम

ईश्वर स्थान बनायेंगे . . . योगेश्वरके . . .

 

योगेश्वरके वाहक बनकर

ग्राम ग्राम में जायेंगे

हृदय हृदय में योगेश्वरके

यात्रा स्थान बनायेंगे… योगेश्वरके . . .

============ ॐ ================

अधिक श्रावण शुक्ल पक्ष १०,११ संवत २०३३ मंगलवार ता. २६-७-७६.

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