पांडुरंग के नयन विहारी

સામાન્ય

पांडुरंग के नयन विहारी

दर्शन आये कृष्ण मुरारी

 

टपक टपक आंसु टपके है, हर्षाश्रु निर्झर छलके है

मौन बन घनश्याम मुरारी   . . . पांडुरंग के

 

पांडुरंग उन्मत बने है, गीता पी कर मस्त बने है

जीवनमें गीता ही छाई . . . पांडुरंग के

 

हृदय भ्रमरका गीता गुंजन, जीवन कमलका रंगीन विकसन

पांडुरंग क्रीडा मन भाई . . . पांडुरंग के

 

श्यामके होठ बने है कंपित, शब्द विलिन है कंठ है गद गद

अखियाँ पांडुरंग की है प्यासी . . . पांडुरंग के

 

भक्तकी चाहत झांकी, ईशकी ईश चाहे अब भक्तकी झांकी

बात भई उल्टी कुछ एसी . . . पांडुरंग के

 

हरी बसे जनके होठों पर, हृदय द्वार है बंद जहां पर

पांडुरंग हरी हृदय बिठाई . . . पांडुरंग के

 

जुग जुगकी अब प्यास बुझेगी, धर्म सृजनकी आश बनेगी

हरी होंगे जब हृदय निवासी . . . पांडुरंग के

======================ॐ===========================

वैशाख वद सोमवारी अमास सं. २०३४ सोमवार ता. ५-६-७८

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