क्या गीता कहती ?

સામાન્ય

गीता कहती नहीं गीता कहती नहीं।

कर्मकांडकी क्रियाए समझाती नहीं…                               गीता कहती…

 

कैसा टीका लगाना है सर पर हमें।

कैसे वस्त्रोको धारण करना है हमें।

कैसा भोजन उपवासमें ये लिखती नहीं…                         गीता कहती…

 

कैसे पुष्पोसे भगवन रिझायेंगे हम।

कौनसी मूर्ति की पूजा रचायेंगे हम।

ध्यान करना किस देवका ये बताती नहीं…                       गीता कहती…

 

===     ===    ===    ===    ===

 

गीता कहती यही गीता कहती यही।

शुभ जीवन की बातें समझाती रही…                                गीता कहती…

 

कर्म करलो पर फलको ईश चरणोमें दो।

प्रभु जो दे उसीसे संतोषी रहो ।

हरि सबके हृदयमें है कहती रही…                                   गीता कहती…

 

दैवी गुणोको जीवनमें लाना हमें।

अपना कौशल प्रभुको है देना हमें।

तु है रामकी संतान ये बताती रही…                                 गीता कहती…

 

किये बिना कुछ मिलता नहीं सत्य है।

किया जो भी नहीं होता व्यर्थ तथ्य है।

तुझमें शक्ति है ईशको पुकार ले सही…                              गीता कहती…

 

पांडुरंगने गीता ज्ञान सबको दिया।

कृष्णका काम दादाने जगमें किया।

ज्ञान,भक्ति, कृतिकी त्रिवेणी बही…                                   गीता कहती…

    ===ॐ===

बैसाख शुक्ल द्वितीया, सं. २०४१, सोमवार | दि. २२-४-८५ |

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