ओ मेरे पांडुरंग तेरे कितने है रंग।

સામાન્ય

ओ मेरे पांडुरंग तेरे कितने है रंग,

कुछ जाने, जहाँको बतायेंगे हम …

आये गंगाके तीर देखे यमुनाके नीर,

किया हमने सरस्वती मांको नमन …

 

ज्ञान भक्ति कृतिकी त्रिवेणी बही,

भाव वर्षाकी रिमझिम बरसती रही,

खिले जीवन केवल किया मनको विमल,

आदमी आदमीका जुडाया संबंध …                  ओ मेरे …

 

तुने भक्तिकी शक्तिका प्रकटन किया,

एक निष्ठा सभर संगठनभी किया,

कि योगेश्वर कृषि मत्स्यगंधा हंसी,

आये बसने योगेश्वर अमृतालयम …                 ओ मेरे …

 

भेदका छेद तुने सहजमें किया,

रक्त सर्जक प्रभु है पिता ये कहा,

कोई ऊंचा नहीं कोई नीचा नहीं,

आज तूटे जगतसे हैं झूठे भरम …                   ओ मेरे …

 

धर्म संस्कृतिका तु सहारा बना,

भ्रांत भक्ति जलाने तु शोला बना,

मिटा मनका मरन मिली ईशकी शरन,

दी है द्रष्टि समझने सुख और गम …                ओ मेरे …

 

आये आंसु ऋषिके नयनमें उभर,

पांडुरंगी जगतकी छबि देखकर,

देखो दुनियाके जन, खोलो अपने नयन,

मात गंगाके तट पर अनोखा मिलन …            ओ मेरे …

=== ॐ ===

मार्गशिर्ष कृष्ण पक्ष अष्टमी, सं. २०४२, शनिवार । दि. ४-१-१९८६।

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