रोहावाले दादा

સામાન્ય

रोहावाले दादा का पैगाम है,

बनाया भहु उसकी संतान है… रे…                     रोहा. . .

 

घर घर जावे ये समजावे सोया कौन जगावे,

खाना कौन पचावे भैया गहरी नींद सुलावे,

लाल रंग लहु का चमकाते भगवान… रे…            रोहा. . .

 

मंदिर मस्जिद गिरिजाघरमें जगन्नाथ को बांटा,

मजहबकी तलवार लिए है लोकनाथ को काटा,

अमृतालयम सबका मुकाम… रे…                     रोहा. . .

 

शेर – हुकुमत को तुने नही सर झुकाया,

अमीरोंके पैसो से तु ना लुभाया,

बिछडेहुओ को गले से लगाया,

सदीओं से सोयेहुओ को जगाया,

खुदा दिलमें है; दि तुने जान… रे…                    रोहा. . .

 

किया करिश्मा खुद के पैसे से; ईन्सान है जाते,

भगवद गीता की बांते नादां सबको समझाते,

“खुद को जानो खुदा पीछानो” यह ज्ञान… रे…    रोहा. . .

 

फक्र भुला ईन्सान खुद का सबके पैर दबावे,

बना पालतु कुत्ते जैसा रोटी उसे नचावे,

“मनुष्य गौरव बढाओ जगमें” ये गान… रे…         रोहा. . .

=== ॐ‌ ===

नवेंबर १९९४।

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