कन्हाईको नयनन नींद न आवे

સામાન્ય

(राग – झुलो झुलो रे दत्तदिगंबर स्वामी…)

 

कन्हाईको नयनन नींद न आवे,

मैया पलनमें झूलावे. . .

मीठी रागीनीसे गीत अनुठे गावे,

मैया लालनको सुलावे. . .

 

दधी मंथन घोष हुआ था, कान्हा भी तबसे जगा था।

पैंजनिया झमकाता था, आंगनमें खुब खेला था।

खुब थक कर वो, जशोदा अंक सीधावे. . .

मैया लालनको सुलावे. . .

 

गोपीके घरमें गया था, महीं मख्खन स्वाद जचा था।

पानेलो नाच कीया था, थोडा मख्खन ही मिला था।

रोते रोते वो, यशोमति गोदमें जावे. . .

मैया लालनको सुलावे. . .

 

पंछीकी छांव पकडने, बछडेकी तरह दौडा था।

गैया चारनकी खातिर, गोपोका भेस सजा था।

कान्हाकी वो, बाल सहज लीलायें. . .

व्रज जनमनको ललचायें. . .

 

सुंदर तन मन कान्हा का, मधुरा है स्नेह हृदयका,

मीठी बानी मन हर्ता, जमुना जल सम निर्मलता।

सुखदायी वे, बालकथा मन भावे. . .

जन्मोंके पाप मिटावे. . .

=== ॐ ===

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