जय जय जय गुरुदेव।

સામાન્ય

जय चिन्मय स्वामी गुरु जय चिन्मय स्वामी,

आदि शंकर पथ के (२) आप अनुगामी…               जय चिन्मय…

 

मोहमयी नगरीमें त्याग जीवन शिक्षा… गुरु त्याग…

शिक्षित यौवनको दी (२) संन्यासी दिक्षा…             जय चिन्मय…

 

ईच्छा यह सब स्थलमें, धर्म प्रवर्तन हो… गुरु धर्म…

ज्ञान पूर्ण संन्यासी (२) स्थान नियामक हो…         जय चिन्मय…

 

गहन धर्म सूत्रोको सरल मधुर करते… गुरु सरल…

वेद गीता उपनिषद (२) सहज साध्य रमते…           जय चिन्मय…

 

तर्क स्नेह मिश्रणसे, धर्म तत्व कहते… गुरु धर्म…

बुद्धि हृदय स्पंदन को (२) मुखरीत है करते…         जय चिन्मय…

 

वाणीमें है गर्जन, हास्य कटाक्ष भरे… गुरु हास्य…

शुष्क हृदय पुलकित कर (२), तत्व रहस्य भरे…     जय चिन्मय…

 

देश विदेश घूमे तुम, धर्म ध्व्जा लेकर…गुरु धर्म…

तप्त जीवनको लगते (२) आप्त और सुखकर…        जय चिन्मय…

 

ज्ञान यज्ञसे गीता जनमन को भायी… गुरु जनमन…

बाल युवक वृद्धो को (२) लगती है भाई…                जय चिन्मय…

 

नमस्कार चरणोमें आप स्वीकार करे… गुरु आप…

पाप पंख को धो कर (२) मोक्ष प्रदान करे…             जय चिन्मय…

=== ॐ ===

श्रावण शुक्ल पक्ष छठ, सं. २०५०, शुक्रवार। दि. १२-८-१९९४।

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