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गंगा मैयाके दर्शन ।

સામાન્ય

गंगा मैयाके दर्शन आये है,

भाव जाह्नवीमें नहाने हम आये है ।            गंगा . . .

 

भक्तिफेरीमें हम जातें,

ईश विचार सभीको कहतें,

मानवमें माधवको हम निहारे है ।              गंगा . . .

 

हृदय हृदयकी स्नेह सरिता,

मानव मनको प्रेमसे जीता,

संघ भावसे एक बने हम आये है ।             गंगा . . .

 

आडंबरके वस्त्र सजेथे,

कर्मकांड शृंगार रचे थे,

विकृत था जो धर्म अभी मिट पाये है ।        गंगा . . .

 

भाव भक्तिका हृदय पिछाना,

कृति भक्तिका मर्मभी जाना,

भक्तिकी शक्ति जो क्रांति लायी है ।             गंगा . . .

 

भेदभावका दफ़न किया है,

ऊंचनीचका हनन किया है,

एक पिताके पुत्र सभी ये दर्शन प्यारा है ।     गंगा . . .

 

समर्थने सहयोग दिया है,

दुर्बलने गौरव पाया है,

भाई भाईका नाता दिलका वादा है ।            गंगा . . .

 

पांडुरंगने की है क्रांति,

आज मिटी है जगकी भ्रांति,

तीर्थराजमें ये कहने हम आये है ।               गंगा . . .

    === ॐ‌ ===

पोष शुक्ल पक्ष १, सं. २०४२, शनिवार । दि. ११-१-१९८६ ।

कृणवन्तो विश्वमार्यम् ।

સામાન્ય

सारे जगमें ईश वाहक बन गुंजेंगे हरदम,

कृणवन्तो विश्वमार्यम् । (४)

 

भेदभाव हो ऊंचनीचके दफन उसे कर देंगे,

दानव वृत्तिको संहारे कफन लिये घूमेंगे,

हृदयकी बीना पर छेडे भक्तिकी सरगम ।

कृणवन्तो विश्वमार्यम् । (४)

 

शौर्य और स्वार्पणके गीत जनगण वृंदोमें गाये,

अस्मिताकी तेजकीर्ण मानव मनमें प्रकटाये,

ईश श्रद्धा विश्वास जगाकर हम कर दे हमदम ।

कृणवन्तो विश्वमार्यम् । (४)

 

अनिष्ट अत्याचार अनर्थोको जगसे मिटाये,

आलसकी निंद्रामें सोये जन जागृत कर पाये,

मानव मन शक्तिसे भर दे और जलाये गम ।

कृणवन्तो विश्वमार्यम् । (४)

 

ऋषि दधीचिका बलिदान हमको आज पुकारे,

अर्जुनके गांडीवका गर्जन शौर्य गीत ललकारे,

अपना रक्त बहाकर करना संस्कृति रक्षण ।

कृणवन्तो विश्वमार्यम् । (४)

 

वसुधा एक कुटुंब बने ऐसा हम यत्न करेंगे,

एक वृत्ति विचार एक ऐसा बंधुत्व रचेंगे,

वैचारीक क्रांति फैलाकर सर्जे स्वर्ण नूतन ।

कृणवन्तो विश्वमार्यम् । (४)

    === ॐ ===